10वी और 12वी के बाद क्या करें ।। 10th और 12th Exam पास करने के बाद क्या करें ।।

यदि आप भी 10वीं और 12वीं का एग्जाम दिए हैं ।। और अपना रिजल्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, तो आप सभी को हम बताते चले की बहुत बच्चे यह डिसाइड नहीं कर पाते हैं कि 10वीं और 12वीं के बाद हम क्या करें और बहुत बच्चे ऐसे होते हैं ।। कि 10वीं और 12वीं के बाद वह गलत रास्ते चुन लेते हैं जिससे उनका करियर खतरे में पड़ जाता है इस आर्टिकल के माध्यम से उन सभी बच्चों को मैं बताना चाहूंगा कि 10वीं और 12वीं के बाद क्या करना है ।। और क्या नहीं करना है हम कुछ ऐसे फील्ड भी बताएंगे की दसवीं और बारहवीं करने के बाद आपका सीधे सरकारी जॉब भी हो सकता है ।। थोड़ा सा प्रयास करने से तो पूरे आर्टिकल को ध्यान से पढ़िए ।।

 

 

स्टूडेंट और उनके पैरेंट्स की जिंदगी में दसवीं और बारहवीं दो अहम पड़ाव होते हैं इन दो प्रभावों के पार करियर को लेकर तमाम तरह के भरम और सवाल उनके दिमाग में होते हैं ।।

 

बोर्ड परीक्षाओं का दौर खत्म होने वाला है ।। और इसी के साथ करियर को सही दिशा देने का वक्त भी शुरू हो चुका है ।। स्टूडेंट और उनके पैरेंट्स की जिंदगी में 10वीं और 12वीं दो अहम पड़ाव होते हैं  ।। इन दो प्राण को पार कर करियर को लेकर तमाम तरह के भ्रम और सवाल उनके दिमाग में होते हैं ।। इन्हीं के जवाब एक्सपोर्ट से बात कर रहे हैं ।। और आपके सवालों का जवाब हम प्वाइंट बाय पॉइंट देने की कोशिश करेंगे ।।

 

POINT :- 1.

जैसे कि हम मान लेते हैं कोई छात्र है जिसका नाम है ।। राहुल राहुल को 12वीं में 98 फ़ीसदी अंक आए ।। बचपन से ही वह पढ़ने में तेज था पापा आईएएस ऑफिसर हैं ।। इसलिए पैसे की की भी कोई समस्या नहीं पेरेंट्स का कोई दबाव नहीं था कि क्या बना है ।। लेकिन यह चाहत जरूर थी कि बेटा इंजीनियर या फिर विदेश में किसी बड़े कॉलेज से अच्छी डिग्री ले 12वीं में संदर्भ परफॉर्मेंस के बाद राहुल का एडमिशन भी दुनिया के टॉप स्कूलों में से एक ब्रिटिश कोलंबिया के साइंस विंग में हो गया ।। लेकिन राहुल को मजा नहीं आ रहा था पापा से बात करने पर यह निर्णय लिया गया कि एक अच्छी करियर काउंसलर से मिल जाए ।। अपॉइंटमेंट मिलने के बाद काउंसलिंग हुई ।। तो नतीजा कुछ और निकाल दरअसल राहुल को फुटबॉल खेलने में मजा आता था ।। दसवीं तक उसने स्कूल की तरफ से स्टेट लेवल का मैच खेला था ।। लेकिन 11वीं से पैरंट्स टीचर दसवीं तक उसने स्कूल की तरफ से स्टेट लेवल का मैच खेला था ।। लेकिन 11वीं से पैरंट्स टीचर्स और और खुद राहुल को लगा की पढ़ाई में भी परफॉर्मेंस बेहतर है ।। और पढ़ाई लिखाई ही की जाए ऐसे में फुटबॉल में आगे बढ़ाने की सोच को रिवर्स की लग गई काउंसलर ने जब राहुल के इस पसंद के बारे में पेरेंट्स को बताया तो वह चौंक गए ।। लेकिन फौरन मन भी गए राहुल को बेहतर ट्रेनिंग के लिए फुटबॉल के एक एलीट क्लब में एडमिशन कराया गया ।। अभी राहुल वाले सिया स्पेन की तरफ से मैच खेलते हैं ।। कमाई अभी बहुत ज्यादा नहीं फिर भी साल के तीन से चार को रुपए तो है ही ।।

POINT:- 2.

 

दिसंबर 2018 में निर्मल को उसकी पेरेंट्स एक करियर काउंसलर के पास ले गए ।। वजह यह थी कि डांस में रुचि रखने वाले निर्मल को साइंस और मैथ से बिल्कुल दिलचस्पी नहीं थी ।। इसके बावजूद उसके पेरेंट्स उसे iit क्रैक करवाना चाहते थे ।। हालात यह थी कि निर्मल 9 और दसवीं में साइंस और मैथ्स पेपर के फाइनल टेस्ट में 40 फ़ीसदी से भी कम अंक पाए ।। इतने कम अंक आने के बाद आगे साइंस रखने के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता ।। लेकिन पेरेंट्स के लिए या नाक की लड़ाई बन गई थी ।। और इस नाक की लड़ाई में बच्चा पीस रहा था ।। खैर जब वह करियर काउंसलर के पास गए ।। तो उन्होंने साफ कहा कि बच्चे का ईट क्रैक करना बहुत मुश्किल है । एक तो इसका साइंस और मैथ्स कमजोर है ।। फिर इन है पढ़ने में इसकी दिलचस्पी भी नहीं है ।। काउंसलर ने सलाह दी कि निर्मल को डानसिक में ही कैरियर बनाने दे लेकिन उसके पेरेंट्स अरे रहे तो काउंसलर ने उन्हें सलाह दीकी बच्चों की काउंसलिंग के साथ आपको भी काउंसलिंग लेनी चाहिए ।। काफी समझाने बुझाने के बाद आखिरकार निर्मल के पैरेंट्स मान गए अब यह फाइनल हो चुका है कि 10वीं और 12वीं में वह साइंस या मैथ्स नहीं रखेगा वैसे देखा जाए ।। तो ऐसी गलतियां करने वाले निर्मल के पेनिस अकेले नहीं है ।। ऐसे पेरेंट्स की संख्या बहुत ज्यादा है ।। बच्चों के लिए करियर के चुनाव के वक्त अक्सर पेरेंट्स ऐसी ही गलतियां करते हैं ।। कुछ गलतियां जो करियर के चुनाव के वक्त पेरेंट्स और बच्चे अक्सर करते हैं ।।

 

गलती नंबर :- 1

दसवीं में साइंस में नवीन फिजिक्स से ज्यादा नंबर मिले हैं ।। तो आगे साइंस ही पढ़नी चाहिए सही क्या ऐसा बिल्कुल भी नहीं है ।। किसी विषय में शानदार अंक पाना और उसे विषय में कैरियर बनाना दोनों अलग बातें हैं करियर बनाने का सीधा सा मतलब है ।। कि स्टूडेंट को उसे खास विषय में 12वीं ग्रेजुएट या पोस्ट ग्रेजुएट भी करना है ।। क्योंकि 12वीं से सिलेबस अचानक बहुत बड़ा हो जाता है इसलिए दसवीं में नंबर लाना और उसके बाद भी अच्छा परफॉर्मेंस करना दोनों में काफी अंतर होता है ।। ऐसा देखा गया है कि 100 में 20 से 30 बच्चे जिनके दसवीं में 90% से भी ज्यादा अंक आए थे ।। 12वीं में वह 50 से 60 फ़ीसदी के लिए भी तरसते रह गए ।।

गलती नंबर :-2.

मेरे सभी दोस्त यही पढ़ रहे हैं इसलिए मैं भी यही पढ़ूंगा ।। सही क्या : अगर 100 बच्चों की बात करें तो इस तरह की गलती करने वाले कम से कम 15 से 20 बच्चे जरूर मिलेंगे ।। दोस्तों को देखकर या दोस्ती ना टूटे इसलिए या फिर अगर कोई बच्चा तेज है ।। तो उसे नोटिस या दूसरी मदद मिलती रहेगी ।। इन चक्कर में बच्चे गलत चुनाव कर लेते हैं ।। अब स्थिति ऐसी बनती है कि बच्चों की दिलचस्पी है ।। ह्यूमैनिटीज में लेकिन दोस्त की वजह से वह चुन लेता है ।। साइंस या कॉमर्स अब पढ़ाई में मन लगेगा कहां से ऐसे में हायर स्टडीज में जाते ही सब्जेक्ट बदलने की नौबत बन जाती है ।। ऐसे में जिस बच्चे के दसवीं बोर्ड में 80 फ़ीसदी अंक आए थे वह 12वीं में 60 फ़ीसदी के लिए भी तरसते रहता है ।। तो बच्चों बेहतर रहेगा की जिसमें दिल लगे उसी को चुने आगे आपके करियर में आसानी होगा ।।

गलती नंबर 3.

मेरा बच्चा, मेरा सपना

यह गलती काफी पेरेंट्स करते हैं।। वह अपनी सोच अपनी चाहत और अपनी नाकामियों की पूर्ति बच्चों से करवाना चाहते हैं ।। इस तरह की सोच बिल्कुल गलत है ।। हर बच्चे की अपनी काबिलियत और चाहत होती है हर कोई डॉक्टर या इंजीनियर नहीं बन सकता है ।। आज तो 3000 से भी ज्यादा करियर ऑप्शन मौजूद हैं फिर हम अपनी सोच को बच्चों पर क्यों ठोकते हैं ।। अपनी नाकामियों को बच्चों पर क्यों ठोकते हैं अपनी असफलताओं को बच्चों पर क्यों ठोकते हैं ।। यही सोच के चलते और यही अपनी सोच को जो ठोकते हैं ।। अपने बच्चों पर इसके वजह से बच्चों को के आगे करियर बनाने में मुश्किल होती है ।। और आगे चलकर करियर ना मिल पाने की वजह से नौकरी न मिल पाने की वजह से वह बच्चा जो है ।। डिप्रेशन का शिकार हो जाता है ।।

 

गलती नंबर :- 4.

बच्चों को जो अच्छा लगे, वही करें

यह अप्रोच सही है लेकिन 100 फ़ीसदी नहीं एब्यूमन दसवीं के बच्चे करियर को लेकर पूरी तरह से मेच्योर नहीं होते ।। कुछ बच्चे तो अपनी बातों और इच्छाओं को पूरी तरह से व्यक्त नहीं कर पाते हैं ।। जबकि कई या तो कर नहीं पाते या चीजों को ठीक तरह से समझ नहीं पाते हैं ।। ऐसे में पेरेंट्स को चाहिए वह बच्चों से बात करें और जरूरत पड़े ।। तो करियर काउंसलर की मदद ले बच्चों पर फैसला लेने के लिए ना छोड़े ।। क्योंकि दसवीं के बच्चे बिल्कुल नादान होते हैं ।। उन्हें सिर्फ किताबी ज्ञान पता है ।। उन्हें नहीं पता है कि किस सब्जेक्ट से हम पढ़ेंगे तो हमें आगे चलकर करियर में आसानी होता तो उनको गार्जियन को समझना होगा कि हमारे बच्चे जो हैं ।। अभी परिपक्व नहीं हुए हैं उन्हें गाइडेंस की जरूरत है ।।

गलती नंबर :- 5.

लोग क्या कहेंगे

ऐसे मामले भी खूब होते हैं बच्चे और पेरेंट्स सोचते हैं ।।  कि साइंस पढ़ना ब्रिलिएंट होने की निशानी है ।। ऐसे में अगर आर्टस लेंगे तो लोग क्या कहेंगे ।। समाज में नाक तो नहीं कट जाएगी लेकिन ऐसा सोचते हुए ।।वह या नहीं सोचते हैं ।। कि जब साइंस या कॉमर्स में बहुत कम अंक आएंगे तब बऐजती बहुत ज्यादा होगी ।। बेशक अगर सब्जेक्ट को पढ़ने का दिल ही नहीं करेगा तो बच्चा मजबूरी में पड़ेगा ।। और ऐसे में अच्छे अंक कहां ले आएंगे ।।

 

गलती नंबर : – 6.

जो नौकरी दिलाई वहीं चुनो,

प्लानिंग  वर्तमान के आधार पर जरूर हो लेकिन लक्ष्य भविष्य को देखते हुए करनी चाहिए ।। यानी कि भविष्य उसे सेक्टर में जॉब की डिमांड कैसी रहेगी ।। मसलन आज आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस Ai की डिमांड भारी है  ।। अगले 5 साल या उसके बाद के वर्षों में इस क्षेत्र में जॉब देने वाली कंपनियों की संख्या उसी के अनुपात में बढ़ेगी ।। जैसे इंडिया के आईटी हब बनने के दौरान हुआ था इसलिए भविष्य को देखकर ही निर्णय लेना चाहिए ।। अगर आप भविष्य को देखकर निर्णय नहीं लेते हैं ।। तो आपके लिए आगे के रास्ते बंद हो जाएंगे ।।

 

गलती नंबर :- 7.

 

आर्थिक स्थिति कोई मुद्दा नहीं है ।।

 

अक्सर बच्चे या पेरेंट्स दूसरों की देखा देखी विदेश में पढ़ाई करने का फैसला लेते हैं ।। करियर के बारे में सोते हुए अपनी फैमिली की आर्थिक स्थिति को भी ध्यान में रखना जरूरी है ।। पढ़ाई में पैसा बेहद अहम रोल अदा करता है जब आप स्कूल में पढ़ते हैं तो कई तरह के स्टूडेंट से आपकी दोस्ती होती है ।। इनमें से किसी की आर्थिक स्थिति अच्छी होती है ।। तो किसी की उतनी बेहतर नहीं होती है ऐसे में किसी दूसरे को देखकर अपने करियर की प्लानिंग ना करें अगर घर की आर्थिक स्थिति सही नहीं है अच्छी नहीं है ।। तो आप महंगे कोर्स के बारे में सोच नहीं सकते हैं ।। हां स्कॉलरशिप या लोन के बल पर इनके बारे में आप सोच सकते हैं लेकिन 100 फ़ीसदी अस्वस्थ नहीं हो सकते हैं ।। कि यह कर ही लेंगे विदेश में पढ़ने की दो वजह होनी चाहिए पहले यह की वहीं पर बसा है ।। दूसरा यह क्यों जो कोर्स आप विदेश में जाकर करना चाहते हैं ।। वह देश में उपलब्ध नहीं है ।।

 

गलती नंबर 8.

मैं तो आई स के लिए ही बना हूं मैं इस की तैयारी करूंगा ।।

वीर सिंह अक्सर अपने दोस्तों और रिश्तेदारों से कह देते थे कि मैं तो सिर्फ इस के लिए बना हूं ।। दरअसल इसका एक जानने वाला आईएएस ऑफिसर था ।। पेरेंट्स दसवीं की रियल के बाद उसे एक करियर काउंसलर के पास ले गए ।। दसवीं में वीर सिंह को 70 फ़ीसदी अंक आए थे ।। जब काउंसलर ने बी से पूछा कि क्या तुम आईएएस बनना चाहते हो ।। तो उसने बताया कि इस को मिलने वाली लाल बत्ती से प्रभावित हूं ।। काउंसलर ने कहा कि सिर्फ लाल बत्ती को देखकर सिर्फ इस नहीं बन जा सकता है ।। इस की बहुत जिम्मेदारी होती है ।। जब वीर सी से पूछा गया कि तुम्हें पता है ।। कि आईएएस बनने के लिए दहेज विश्लेषण आत्मक क्षमता की बहुत ज्यादा जरूरत होती है क्या तुम्हारी दिलचस्पी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाओं में है ।। साथ ही हर साल यूपीएससी और स्टेट सिविल एग्जाम में 10 लाख से ज्यादा स्टूडेंट बैठते हैं ।। पूरी तैयारी में 3 से 4 साल या फिर इसे भी ज्यादा वक्त लग सकता है यह सब सुनने के बाद वीर सिंह ने 12वीं के बाद करियर पर फोकस करने का मन बनाया । 

बच्ची का रुझान और काबिलियत जानी है तो करवा साइकोमेट्रिक टेस्ट

 

इस देश से बच्चों के रुझान और काबिलियत की जानकारी मिलती है ।। इसमें एटीट्यूड टेस्ट और कैरियर इंटरेस्ट जैसे कई टेस्ट होते हैं ।। एक्टिव टेस्ट जहां स्टूडेंट की पूरी पर्सनालिटी के लिए होता है ।। वही करियर इंटरेस्ट टेस्ट सब्जेक्ट या करियर चुनने में मददगार होता है ।। यह टेस्ट किसी काम को करने की स्टूडेंट की काबिलियत के बारे में आइडिया देते हैं ।। मसलन अगर कोई बच्चा इंजीनियर बनना चाहता है ।। तो वह क्या हुआ इसके लायक है यदि नहीं इंजीनियरिंग में किस ट्रेड में वह बेहतरीन बेहतर परफॉर्म कर सकता है ।। इसकी भी जानकारी टेस्ट से मिल जाती है इस टेस्ट के जरिए कोई अगर करियर नहीं बल्कि करियर ऑप्शन की सलाह दी जाती है ।। इस टेस्ट में 300 से 400 सवाल होते हैं जिनकी जवाब हां या ना में देने होते हैं ।। हालांकि ध्यान रखें कि यह टेस्ट किसी अच्छे साइकिल साइकोलॉजिस्ट से या करियर काउंसलर से ही कारण साथ ही यह जानना भी जरूरी है ।। कि वही टेस्ट भरोसेमंद जिन्हें इंडियन स्टूडेंट के मुताबिक तैयार किया गया है ।। आमतौर पर यह टेस्ट महंगी हो सकते हैं लेकिन बहुत ही ज्यादा फायदेमंद हो सकते हैं ।। यह टेस्ट करने के बाद हंड्रेड परसेंट अगर बच्चा इस टेस्ट में पास कर जाता है ।। और उसको जी फील्ड में रुचि है ।। वह पता चल जाता है, तो हंड्रेड परसेंट वह करियर में भी सफलता प्राप्त कर सकता है ।।

कतना भरोसेमंद है साइकोमेट्रिक टेस्ट 

करियर काउंसलर की मदद लेने पर अमूमन और टेस्ट जरूर कराया जाता है ।। इससे स्टूडेंट की पसंद इक और उसकी नॉलेज का पता चल जाता है ।। लेकिन इससे भी 100% संतोष आप नहीं हो सकते ।। इस टेस्ट के अलावा भी कई बातें होती है ।। जिनका ध्यान रखना जरूरी है ।। इसमें फैमिली की आर्थिक स्थिति सबसे खास है मशरूम कोई बच्चा विदेश जाकर कोर्स करना चाहता है ।। लेकिन उसकी फैमिली की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है ।। तो वह बच्चा हमेशा ही दबाव में रहेगा हो सकता है ।। कि दबाव की वजह से उसकी परफॉर्मेंस असर पड़े और वह बेहतर न कर पाए ।। इसलिए सबसे बड़ी पॉइंट यहां पर यह है ।। उसे बच्चों की फैमिली की आर्थिक स्थिति कैसी है ।। इसी के अनुसार वह यह तय करें कि वह विदेश जा सकता है ।। या नहीं जा सकता है कभी भी गलत रास्ता ना अपना ।।

करियर या सब्जेक्ट चुने से पहले खुद से पूछे इनका जवाब क्या करें क्या ना करें

 

अगर आप किसी वजह से अपने करियर को बच्चों के करियर को लेकर टेंशन में है तो उसको काउंसलर या साइकोलॉजिस्ट के पास नहीं ले जाना है चाहते हैं तो भी खुद मोटा-मोटा अनुमान लगा सकते हैं इसके लिए आपको बच्चों से कुछ सवाल पूछने होंगे जो सवाल हम नीचे दे रहे हैं वही सवाल आप अपने बच्चों से पूछेंगे ।।

1. कौन सा सब्जेक्ट पढ़ने में मजा आता है ।।

2. किस सब्जेक्ट में सबसे ज्यादा नंबर आते हैं ।।

3. जिस करियर को चुना चाहता है उसे 20 से 25 साल तक करने को तैयार हो या नहीं ।।

4.जिंदगी में क्या बनना चाहता है और क्यों बनना चाहता है ।।

5. बाहर जाकर काम करना पसंद है या फिर ऑफिस के अंदर बैठकर काम करना पसंद है ।।

6. लोगों से मिलना पसंद है या फिर ज्यादा से ज्यादा किताबी नॉलेज हासिल करना पसंद है ।।

7. बिजनेस से जुड़ी बुक्स पढ़ने अच्छा लगता है या आर्ट्स के बारे में पढ़ना अच्छा लगता है ।।

8. खूब बातें करना पसंद है या चुपचाप रहना पसंद है ।।

9. ज्यादा मेहनत वाला काम करना चाहते हैं या कम मेहनत वाला काम करना चाहते हैं ।।

10. ट्रैवल करना पसंद है या फिर एक ही जगह पर रहना पसंद है ।।

इन सवालों के जवाब के बाद इतना तो पता चल ही जाता है कि बच्चे की क्या पसंद है और किसी तरह का काम करना उसके लिए सही रहेगा

 

ध्यान भी और सावधान भी :-

एक गलत फैसला लेने से अच्छा है फैसला लेने में देरी करना दसवीं के बाद आपकी सरिता क्या होगी ।। इसे लेकर आप तो सोच ही रहे होंगे ।। आपके पैरेंट्स भी चिंतित होंगे इसलिए आखिर फैसले पर पहुंचने से पहले एक बार नहीं 100 बार सोचे किसी झंकार या करियर काउंसलर की भी मदद ले करियर काउंसलर के पास जाने का फैसला भी तभी सही हो सकता है ।। जब वह अच्छा काउंसलर हो इन दोनों कोई ऐसे करें काउंसलर भी है ।। जो किसी ने किसी एजुकेशन इंस्टिट्यूट से कमीशन लेते हैं ।। आप जब उनसे सलाह लेने जाते हैं तो वह एक इंस्टिट्यूट के एजेंट के रूप में आपको सलाह देने लगते हैं ।। ना कि काउंसलर के रूप में ।।

काउंसलर में क्या हो और काउंसलर में क्या होना चाहिए इसे विस्तृत से जानते हैं ।।

कम से कम 5 साल का अनुभव होना चाहिए

हर तरह की जानकारी अच्छी हों

मॉडर्न और आप भी करियर के बारे में भी पूरी तरह से जानकारी हो ।।

बच्चों की साइकोलॉजी पढ़ने की क्षमता हो ताकि बच्चे से कनेक्ट हो सके

किसी खास इंस्टिट्यूट में जाने पर जोर नहीं देता हो

 

रिव्यू अच्छा हो

 

पैरंट्स डे इन तीन खास एक पर ध्यान ।।

1. बच्चे क्या चाहता है ?

इस बात को सबसे ज्यादा अहमियत दें सच तो यह है ।। कि आज के बच्चों को इंटरनेट टीचर्स और दोस्तों के माध्यम से कैरियर के बारे में कई ऐसी बातें पता होती है, जिन्हें उनके पैरेंट्स भी नहीं जानते हैं ।।

 

2. स्कूल टीचर की क्या राय है ?

अमूमन एक बच्चा 8 से 10 साल तक किसी स्कूल में पढ़ता है ।। ऐसे में वहां के टीचर्स को उसे बच्चों के बारे में काफी कुछ पता होता है ।। बच्चों में क्या कमियां है, क्या उनकी मजबूती है ।। पसंद और नापसंद के बारे में खूब जानते हैं ऐसे में टीचर्स की राय बहुत अहम होती है ।।

3. दसवीं के मार्क्स ही सब कुछ नहीं है ।।

अगर दसवीं के अंकों को आधार बनाकर ही सब्जेक्ट का चुनाव करना चाहते हैं तो यह देखना जरूरी होगा कि इन सब्जेक्ट में क्या पहले क्लास सेवंथ क्लास 8 क्लास 9 में अच्छे अंक आए हैं अगर नहीं आए हैं तो सिर्फ दसवीं के अंकों को आधार बनाकर सब्जेक्ट का चुनाव करना सही नहीं है इससे बच्चों की करियर पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है इसलिए मेरे बताए हुए सारे दिशा निर्देश का अच्छे से पढ़ें और अपना निर्णय ले ।।

 

कुछ काम के सवाल और उनके जवाब मैं आप लोगों को यहां पर बता रहा हूं ।।

1. मेरी इच्छा है कि मैं एडवोकेट बनूं जबकि मेरी दिलचस्पी फिजिक्स और मैथ्स पढ़ने में है मुझे मेरे सीनियर ने कहा कि मैं आज से पढ़ाई करूं मैं क्या करूं ।।

दसवीं के बाद या 11वीं से अपने देश में ला Law की पढ़ाई नहीं होती है ।। आपको इसके लिए कम से कम 12वीं करनी होगी इसके बाद ही आप Law की पढ़ाई कर सकते हैं ।। ला Law की पढ़ाई कर सकते हैं, वही आपने कहा है, कि आपकी दिलचस्पी फिजिक्स में है, लेकिन आप एडवोकेट बनना चाहते हैं ऐसे में आपके लिए या बेहतर रहेगा कि आप साइंस का चुनाव ही आगे की पढ़ाई के लिए करें // दरअसल साइंस में दिलचस्पी से यह तो पता चल जाएगा कि आपकी विश्लेषण क्षमता कितनी अच्छी है ।। ऐसे में लॉयर की करियर में आगे आपके लिए फायदेमंद भी हो सकता है, ।। ऐसा नहीं है कि आप आर्ट से पढ़ाई कर एडवोकेट नहीं बन सकते पर सही विकल्प साइंस ही है ।। तो आप साइंस ही पढ़ाई करें ।।

 

2. दसवीं में साइंस में 91 फ़ीसदी अंक है क्या मुझे आगे साइंस ही लेना चाहिए मेरे पेरेंट्स मुझे आईआईटी की तैयारी करने के लिए कह रहे हैं हालांकि मेरी दिलचस्पी एकाउंट्स में है ।।

किसी भी एग्जाम में 91 फ़ीसदी अंक एक अच्छा प्रतिशत माना जाता है ।। वही दसवीं के लिए तो यह एक बेहतर प्रतिशत है ।। ही पर केवल इसी आधार पर आगे की पढ़ाई में साइंस सब्जेक्ट का चयन करना सही विकल्प नहीं है ।। जबकि आपकी दिलचस्पी एकाउंट्स में है दरअसल अगर 10वीं  और 11वीं सिलेबस को ध्यान से देखेंगे तो दोनों में काफी फर्क है ।। और दोनों का अस्तर भी काफी अलग है दसवीं का सिलेबस जहां आसान है ।। वही 11वीं का सिलेबस काफी बड़ा है ।।दूसरी बात यह है कि आपकी दिलचस्पी भी अकाउंट में ही है ।। ऐसे में आपको अपने दिलचस्पी को दरजी देनी चाहिए ।।

3.मेरा नाम वंदना है मेरे टीचर कहते हैं कि मुझे इंजीनियरिंग की तैयारी नहीं करनी चाहिए क्योंकि मुझे IIT क्रैक करने वाले एक्सपोर्ट नहीं है मेरे math में आठवीं और नवी में अच्छे ग्रेड नहीं रहे हैं पर मुझे मैथ और पेंटिंग्स बहुत ही पसंद है मैं क्या करूं यह एक लड़की का सवाल है जिसे मैं जवाब निश्चित देने वाला हूं ।।

 

आपने बताया है कि आपको अच्छे ग्रेड नहीं मिला है लेकिन आपको math पसंद है वही आपके टीचर ने भी आपको कहा है कि आपके लिए IIT क्रैक करना मुश्किल होगा तो इस पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है क्योंकि आपके टीचर को वह पता है कि आपके अंदर क्या कैपेसिटी है दरअसल कई बार ऐसा होता है कि आप अपनी पसंद को समझ नहीं पाते हैं ऐसे में आप किसी अच्छी जानकारी या बेहतर करियर काउंसलर की मदद ले सकते हैं यह सच है कि आईआईटी क्रैक करने के लिए शानदार तैयारी और क्षमता होनी ही चाहिए हां दूसरे इंजीनियरिंग एग्जाम को क्वालीफाई करना आईआईटी की तुलना में आसान है वैसे दिल्ली एनसीआर में कई ऐसे प्राइवेट इंजीनियरिंग कॉलेज चल रहे हैं जहां से कोर्स करने के बाद भी आपको बेहतर जब मिलना मुश्किल होता है ऐसे में आपके लिए पेंटिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ना भी एक बेहतर विकल्प हो सकता है आपका मैथ्स फिजिक्स और केमिस्ट्री कितना मजबूत है यह आप दूसरी टीचर या आपके सीनियर से भी पूछ सकते हैं उनसे आप राय ले सकते हैं हालांकि एक तरीका यह भी है कि कहीं डिप्लोमा में से इंजीनियरिंग की शुरुआत की जाए और अगर उसमें मन राम गया तो डिप्लोमा के बाद सीधा बीटेक सेकंड ईयर में एडमिशन हो मिलना भी मुश्किल होता हैऐसे में आपके लिए पेंटिंग के क्षेत्र में आगे बढ़ना भी बेहतर हो सकता है आपका मैच फिजिक्स और केमिस्ट्री कितना मजबूत है या आप दूसरे टीचर या अपने सीनियर से भी पूछ सकते हैं उनसे राय ले सकते हैं हालांकि एक तरीका यह भी है कि कहीं डिप्लोमा से इंजीनियरिंग की शुरुआत की जाए और अगर उनमें मंडराम गया तो डिप्लोमा के बाद सीधा बीटेक सेकंड ईयर में एडमिशन हो ।।

 

दसवीं के बाद क्या है ऑप्शन 

 

1. 11-12 व

 

साइंस पीसीएम फिजिक्स केमिस्ट्री मैथ्स पीसीबी फिजिक्स केमिस्ट्री बायोलॉजी लाइब्रेरी साइंस ।।

 

कॉमर्स सीसी अकाउंट

 

आर्ट एबीसी हक

 

फुल फॉर्म लिखें

2. पॉलिटेक्निक

3.आईटीआई

4.पैरामेडिकल

5.स्टार्ट फ्रॉम कोर्स ओं ए ब्यूटी एंड कस्टमोलॉजी 6.ज्वेलरी डिजाइनिंग आदि

  • क्या 12वीं के बाद बदल ले सब्जेक्ट ?
  • एक आर्मी में कुछ ही समय बिताने के बाद आपको पता चलने लगता है कि सब्जेक्ट का चयन जो चयन किए हैं उसे सही रहा है या नहीं और यह भी कि इससे जुड़ा करियर कैसा रहेगा अगर चुनाव सही हुआ है तो नंबर भी अच्छे आएंगे और मन भी लगेगा अगर चुनाव गलत रहा तो किताब देखने के बाद यही लगेगा कि आखिर यह विषय चुना ही क्यों है जब मन परेशान हो जाए तो बिल्कुल ना सोचे कि ऑप्शन खत्म हो गए हैं आप 12वीं के बाद भी सब्जेक्ट बदल सकते हैं गलती जब पता चल जाए तभी सही कर ले ऐसा नहीं की 12वीं के बाद आपका मन नहीं लग रह ऐसा नहीं की 12वीं के बाद आपका मन नहीं लग रहा हैदो नंबर तो नंबर भी आपकी अच्छे आएंगे और आपका मन भी लगेगा अगर चुनाव गलत रहा तो किताब देखने के बाद यही लगेगा कि आखिर यह विषय मैंने चुन ही क्यों है जब मन परेशान हो जाए तो ऐसा बिल्कुल ना सोचे कि ऑप्शन खत्म हो गया है आप 12वीं के बाद भी सब्जेक्ट बदल सकते हैं गलती जब पता चल जाए तभी सही कर ले वरना आगे चलकर आपके पास करियर के ऑप्शन बहुत कम रह जाएंगे क्योंकि जैसे आपकी सही जानकारी नहीं होगा तो आपको अच्छे से कंपटीशन एग्जाम भी आप नहीं दे सकते हैं क्योंकि अपने आपको जिस सब्जेक्ट में रुचि है वह सब्जेक्ट आपने लिया नहीं गलत सब्जेक्ट का सिलेक्शन करना आपको आगे चलकर मांगा पड़ेगा
  • खुद को जांच अपने आप कोजांच
  • मान ले कि अपने 12वीं के लिए साइंस ली लेकिन अब पढ़ाई में मुश्किल आ रही है अब आपका मन कह रह अब पढ़ाई में मुश्किल आ रही है अब आपका मन कह रहा है कि की जर्नलिज्म या लॉयर की पढ़ाई कर लेते तो अच्छा रहता होगा कि एक बार किसी अच्छे पत्रकार या किसी अच्छी वकील और पत्रकारिता या लॉयर की पढ़ाई कर रहे हैं किसी सीनियर से मिले उनसे चैलेंज के बारे में पूछे साथ ही यह भी देखें कि इन फील्ड्स में अच्छा करने के लिए क्या खासियत होनी चाहिए पत्रकार या वकील को एक-एक बात का काफी गहराई से पता रहता है और उनको यह अध्ययन करना होता है अगर आप इनमें से कुछ बनना चाहते हैं तो अच्छी की क्या आप में लगातार पढ़ने का दर्ज है दरअसल बाहर से देखने पर सब अच्छा लगता है लेकिन जब मन में काम में नहीं लगेगा तो सफल हो पाना किसी भी फील्ड में मुश्किल है।।
  • 12वीं के बाद क्या है विकल्प
  • इंजीनियरिंग
  • इंजीनियरिंग में करियर बनाने के लिए तमाम एड्रेस टेस्ट पास करना होता है एडमिशन मिलने के बाद पढ़ाई अनुमान 4 वर्षों की होती है।।
  • ब्रांचेस आईटी ईजी सिविल इंजीनियरिंग मैकेनिकल केमिकल एग्रीकल्चर बायोमेडिकल कोर्स 12वीं के बाद किया जा सकते हैं।।
  • एक बात यहां पर ध्यान दीजिए कि एयरोनॉटिकल सेरेमिक एनवायरमेंटल मरीन मीनिंग सिल्क एंड टेक्सटाइल में भी अभी काम है लेकिन उनकी डिमांड बहुत ज्यादा है अलग-अलग टेस्ट की जानकारी दे सकते हैं जैसे जी मैं जी एडवांस्ड
  • Jee mance je advance
  • BITSAT
  • Vitee
  • 2. मेडिकल इसमें कई ऐसे फील्ड हैं जैसे मेडिसिन एलाइड हेल्थ साइंस पैरामेडिकल इन सब में योगिता 12वीं बायोलॉजी से होनी चाहिए मेडिसिन में करियर बनाने के लिए एंट्रेंस टेस्ट नित और भी कुछ एग्जाम है जो पास करना होता है इसकी पढ़ाई अमूमन 5 वर्षों की होती है ।।
  • 3. एलाइड हेल्थ साइंस अमूमन एक कोर्स दो से तीन साल के होते हैं बी फार्मा बीएससी नर्सिंग बैचलर इन ऑक्यूपेशनल थेरेपी रेडियो थैरेपी बीएससी इन ऑपरेशन थियेटर टेक्नोलॉजी आदि जरूरी
  • 4. टीचिंग के क्षेत्र में भी आप करियर बना सकते हैं जैसे अप डेट एक डेट एग्जाम अब 12वीं के बाद दे सकते हैं
  • 5.सेवा में भी आप 12वीं के बाद करियर बना सकते हैं जैसे एनडीए आर्मी नेवी एयरफोर्स
  • 6.degree course 3 sal ke kar sakte hain उसमें बीए बीकॉम बीएससी एलएलबी बीबीए बीसीए बीएफ बीबीएम बीएफएम बीएमसी इत्यादि कोर्स 12वीं के बाद आप कर सकते हैं ।।
  • 7.डुएल डिग्री कोर्स 4 साल के होते हैं जो 12वीं के बाद कर सकते हैं बा प्लस B.Ed बीएससी प्लस B.Ed बा प्लस लब बीकॉम प्लस लब बीबीएम प्लस लब बा प्लस लब
  • 8.कुछ प्रोफेशनल डिग्री कोर्स होते हैं जो आप 12वीं के बाद कर सकते हैं जैसे का की इत्यादि कोर्स ऑफ 12वीं के बाद कर सकते हैं।।
  • 9. कुछ डिप्लोमा कोर्स होते हैं जैसे
  • फाइनेंस मैनेजमेंट होटल मैनेजमेंट फॉरेन लैंग्वेज फायर सेफ्टी जर्नलिज्म होटल मैनेजमेंट ज्वेलरी डिजाइनिंग फिल्म डायरेक्शन स्क्रीन राइटिंग सिनेमैटोग्राफी फिल्म एडिटिंग फिल्म एक्शन इन डिप्लोमा कोर्सेज में भी काम है और डिमांड ज्यादा इवेंट मैनेजमेंट रोलर मैनेजमेंट होम साइंस टूरिज्म फैशन डिजाइनिंग इंटीरियर डिजाइनिंग साउंड डिजाइनिंग
  • 10.यह ऑप्शन सभी के पास होता है खेल एक ऐसा विकल्प है जो दुनिया देश ही नहीं पूरी दुनिया में हमेशा से मौजूद रहा है लेकिन लोगों की दिलचस्पी पिछले 15 से 20 वर्षों में ज्यादा बड़ी है
  • और अंत में हम आप सभी से यही कहना चाहेंगे कि अगर कोई पोस्ट में त्रुटि हो गई हो तो हमें क्षमा करें और कमेंट करके अवश्य बताएं की पोस्ट में कहां आर्टिकल में कहां त्रुटि है ताकि हम उसे त्रुटि को दूर करेंगे और जो भी हमने इस आर्टिकल में लिखा है वह हंड्रेड परसेंट सही पाए गए हैं तो ए लाभदायक है यह सारे पॉइंट आप एक-एक करके नोट करके पढ़ लीजिए अगर कहीं भी त्रुटि हो तो उसके लिए क्षमा चाहते हैं ।।

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